
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों को फिजूलखर्ची रोकने और ईंधन की बचत करने का एक बड़ा और व्यावहारिक संदेश दिया है। बुधवार को हुई बैठक के दौरान पीएम मोदी ने मंत्रियों को ‘कार पूलिंग’ (गाड़ी साझा करने) अपनाने की सलाह दी, ताकि न सिर्फ ईंधन की बचत हो बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाए।
“एक ही जगह से निकलकर एक ही मंजिल जाना, तो अलग वाहन क्यों?”
कैबिनेट बैठक के दौरान जब प्रधानमंत्री ने देखा कि कई मंत्री अलग-अलग सरकारी वाहनों से पहुंचे हैं, तो उन्होंने बेहद सहज लेकिन प्रभावी अंदाज में एक सवाल उछाला। पीएम ने कहा:
“जब हम सब एक ही जगह से निकल रहे हैं और हमारी मंजिल भी एक ही है, तो क्या हमें कार पूलिंग का विकल्प नहीं चुनना चाहिए?”
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री सिर्फ मंत्रियों को सलाह ही नहीं दे रहे, बल्कि खुद भी मिसाल पेश कर रहे हैं। उन्होंने हाल के दिनों में अपने खुद के सुरक्षा काफिले (VIP काफिले) को छोटा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों को भी अपने साथ चलने वाले वाहनों की संख्या को सीमित करने की बात कही है, ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
जमीनी स्तर पर दिखने लगा असर, एक ही गाड़ी में दिखे कई मंत्री
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर महज कुछ ही घंटों के भीतर बुधवार शाम को साफ देखने को मिला। प्रगति मैदान (कर्तव्य भवन-3) में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए कई राज्य मंत्री अलग-अलग गाड़ियों के बजाय एक ही कार में सवार होकर पहुंचे। मंत्रियों का यह अंदाज सचिवालय और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
डिजिटल माध्यम और वीआईपी संस्कृति पर लगाम
इस बैठक में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला। समय और संसाधनों की बचत के लिए कम से कम छह मंत्रियों ने इस ‘प्रगति बैठक’ में वर्चुअल (डिजिटल) माध्यम से शिरकत की। अब तक आमतौर पर केवल सचिव और मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ही इन बैठकों में वर्चुअली जुड़ते थे, लेकिन मंत्रियों की इस पहल को वीआईपी संस्कृति को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यही नहीं, इस अपील का असर अब भाजपा शासित राज्यों में भी दिखने लगा है, जहाँ कई मंत्रियों ने अपने सुरक्षा वाहनों की संख्या घटा दी है और कुछ नेता तो बस व मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आए हैं।
“जनता के बीच जाएं, संवाद बढ़ाएं”
ईंधन बचाने की इस मुहिम के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट सहयोगियों को जनता से सीधा जुड़ाव रखने की भी नसीहत दी। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर सीधे नागरिकों के बीच समय बिताएं, ताकि सरकार की योजनाओं का जमीनी फीडबैक मिल सके और जनता व सरकार के बीच का फासला कम हो।



